Tuesday, 13 March 2012

एक दिन मुझे भूल जाओगे तुम......
नजरो से कही दूर चले जाओगे तुम....
लब्ज मेरे बया न कर सकेगे कहानी तेरी....
सच में बहुत याद आओगी तुम...
एक सवाल होगा बस यही.....कभी खुद से ....कभी खुदा से भी....
रंग भरने को जीवन में क्या कभी लौट आओगी  तुम...???
रंग भरने को जीवन में क्या कभी लौट आओगी तुम... ???
............................ ये कविता...उसके लिए ......
जिसने मुझे सोने न दिया.................

.<<<<<<<<नितीश प्रताप सिंह >>>>>>>>>>
ज़िन्दगी एक ज़हर है.................मौत इससे बेहतर है...................